
भारतीय रेल के आधुनिकीकरण एवं गुणवत्ता नियंत्रण को सुदृढ़ बनाने की दिशा में उत्तर मध्य रेलवे के प्रधान मुख्य यांत्रिक इंजीनियर ए. के.द्विवेदी के मार्गदर्शन तथा मुख्य कारखाना इंजीनियर रजनीश बंसल के कुशल नेतृत्व में रेल स्प्रिंग कारखाना, सिथौली (ग्वालियर) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है। कारखाने की केमिकल एंड मेटलर्जिकल (C&M) प्रयोगशाला को राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड ((National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories)) द्वारा दिनांक 10 जून, 2026 को आधिकारिक मान्यता (Accreditation) प्रदान की गई है।
इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के साथ यह प्रयोगशाला उत्तर मध्य रेलवे की पहली ऐसी प्रयोगशाला बन गई है जिसे NABL प्रत्यायन प्राप्त हुआ है। NABL द्वारा जारी यह प्रतिष्ठित प्रमाण-पत्र 10 जून, 2026 से 09 जून, 2030 तक, अर्थात् आगामी चार वर्षों के लिए वैध रहेगा।
रेल स्प्रिंग कारखाना, सिथौली भारतीय रेलवे के विभिन्न रोलिंग स्टॉक्स, जैसे LHB एवं ICF कोचों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले हॉट-कॉइल्ड हेलिकल स्प्रिंग्स का निर्माण करता है। ऐसे में यह मान्यता प्रयोगशाला की तकनीकी दक्षता, परीक्षण क्षमता तथा गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत पुष्टि है।
इस वैश्विक स्तर की मान्यता से रेल स्प्रिंग कारखाना तथा भारतीय रेल को ISO/IEC 17025 मानकों के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता प्राप्त हुई है। इसका तात्पर्य यह है कि अब सिथौली स्थित C&M प्रयोगशाला द्वारा जारी की जाने वाली सभी परीक्षण रिपोर्टों (Test Reports) को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता एवं स्वीकार्यता प्राप्त होगी।
रेल स्प्रिंग कारखाना, सिथौली की इस ऐतिहासिक सफलता पर उत्तर मध्य रेलवे के अधिकारियों एवं कारखाने के कर्मचारियों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। इसे भारतीय रेल की “जीरो डिफेक्ट” (Zero Defect) नीति को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे उच्च गुणवत्ता उत्पादन, परीक्षण की विश्वसनीयता तथा विफलता विश्लेषण (Failure Analysis) जैसी गतिविधियाँ और अधिक सुदृढ़ होंगी।
यह कार्य सलाहकार संस्था मेसर्स CONSULTRAIN MANAGEMENT SERVICES, कोलकाता के परामर्श एवं मार्गदर्शन में संपादित किया गया, जिस पर कुल ₹4.73 लाख का व्यय हुआ।
इस उपलब्धि को प्राप्त करने में रेल स्प्रिंग कारखाना, सिथौली के मुख्य कारखाना प्रबंधक शिवाजी कदम, उप मुख्य यांत्रिक इंजीनियर भानु प्रताप सिंह, सहायक रसायन एवं धातुकर्मज्ञ रमेश कुमार हनोते, सहायक कार्य प्रबंधक धनंजय रहालकर, रसायन एवं धातुकर्म अधीक्षक भूपेन्द्र मीणा तथा उनकी समर्पित टीम का विशेष योगदान रहा। उनके अथक प्रयासों, तकनीकी दक्षता और प्रतिबद्धता के परिणामस्वरूप यह महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त हो सकी है।
